भाग्यचक्र उज्जैन

भाग्यचक्र उज्जैन

अंगारक दोष पूजन

ज्योतिष शास्त्र में अंगारक दोष को एक विशेष स्थान दिया गया है। जब किसी जातक की जन्मकुंडली में मंगल तथा राहु की युति है होती है तो अंगारक योग का निर्माण होता है इस योग के कारण वश मनुष्य में क्रोध की अधिकता अत्यधिक बढ़ जाती है, सख्त स्वभाव व बुद्धि भ्रमित होती है ऐसे जातक के जीवन में स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां बनी रहती है या हम कह सकते हैं कि स्वास्थ्य में निरंतर उतार-चढ़ाव बना रहता है। साथ ही साथ ऐसे मनुष्य अत्यधिक क्रोधी स्वभाव के भी होते हैं।


अब जानते हैं कि जन्म कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष, पितृदोष को जन्म कुंडली के अनुसार तथा जातक के जीवन के लक्षणों के अनुसार भी जाना जा सकता है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जातक/व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम और दशम भाव में सूर्य राहु की युति बने तो पितृदोष का निर्माण होता है पंचम, नवम स्थान में सूर्य अथवा चंद्रमा के साथ राहु होने से भी पितृदोष होता है पंचमेश अथवा नवमेश नीच राशि में हो या अशुभ भावों में हो अथवा राहु केतु आदि से संयुक्त हो तो भी पितृदोष होता है इनके अतिरिक्त अन्य और भी कारणों से पितृदोष निर्मित होता है। यदि राहु केतु सूर्य के साथ १० अंकों से कम दूरी पर स्थित हो तो दोष का प्रभाव बढ़ जाता है।पितृदोष के कारण जातक के जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आती है जैसे विवाह में रुकावट या वैवाहिक जीवन में समस्या संतानोत्पत्ति में समस्या रोजगार आदि में समस्या ग्रह कलेश धन हानि आदि के कारण दुःख बना रहता है।

अंगारक शांति पूजन

इस दोष की शांति करवाने के पश्चात जातक के जीवन मे इस दोष के कारण होने वाले नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है।